श्री कृष्ण जन्मभूमि (गर्भ गृह)
मथुरा मंडल · श्री कृष्ण बाल स्वरूप
भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य स्थल — कंस का कारागार। आधुनिक व प्राचीन वास्तुकला, अति-सुरक्षित परिसर।
॥ मंदिर कोष ॥
ब्रज मंडल के समस्त विरासत मंदिरों का प्रामाणिक विवरण
मथुरा मंडल · श्री कृष्ण बाल स्वरूप
भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य स्थल — कंस का कारागार। आधुनिक व प्राचीन वास्तुकला, अति-सुरक्षित परिसर।
मथुरा मंडल · श्री द्वारकाधीश
राजाधिराज रूप में भगवान कृष्ण की पूजा; 1814 ई. में सेठ गोकुलदास द्वारा निर्मित। राजस्थानी-मराठा स्थापत्य, हिंडोला उत्सव प्रसिद्ध।
मथुरा मंडल · यमुना महारानी
कंस वध के पश्चात भगवान कृष्ण का विश्राम स्थल। लाल बलुआ पत्थर के घाट; नित्य संध्या भव्य यमुना आरती।
मथुरा मंडल · श्री विष्णु / वामन स्वरूप
मथुरा की चार दिशाओं के रक्षक देवताओं में से एक — प्राचीन वैष्णव पीठ।
मथुरा मंडल · भूतेश्वर महादेव
मथुरा के चार दिग्पालों में से एक (उत्तर दिशा के रक्षक) — अति-प्राचीन स्वयंभू शिव पीठ।
मथुरा मंडल · महाविद्या देवी
कंस की कुलदेवी और तंत्र साधना का प्राचीन केंद्र — शक्तिपीठ परंपरा।
मथुरा मंडल · श्री केशवदेव
मूल जन्मभूमि परिसर के समीप स्थापित प्राचीन मंदिर — गुप्तकालीन व मराठाकालीन अवशेषों पर पुनर्निर्मित।
वृंदावन मंडल · श्री बांके बिहारी (त्रिभंगी)
स्वामी हरिदास जी की निधि; संवत् 1921 (1864 ई.) में निर्मित। पर्दे के माध्यम से झांकी दर्शन; घंटी-घड़ियाल नहीं बजता।
वृंदावन मंडल · श्री राधा रमण
संवत् 1599 में गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा शालिग्राम शिला से प्रकटित विग्रह — 500 वर्षों से अनवरत अग्नि पर प्रसाद।
वृंदावन मंडल · श्री गोविंद देव जी
राजा मानसिंह द्वारा 1590 ई. में लाल बलुआ पत्थर से निर्मित 7-मंजिला भव्य मंदिर — मध्यकालीन स्थापत्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण।
वृंदावन मंडल · श्री मदन मोहन
वृंदावन का सबसे पुराना स्थापित मंदिर (सनातन गोस्वामी) — द्वादशादित्य टीले पर 50+ फीट ऊंचा शिखर।
वृंदावन मंडल · श्री राधा वल्लभ
हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित — राधा-कृष्ण के अभिन्न स्वरूप की पूजा; राधा जी का विग्रह नहीं, केवल गद्दी व मुकुट।
वृंदावन मंडल · श्री राधा दामोदर
जीव गोस्वामी द्वारा स्थापित — श्री कृष्ण के चरण-चिह्न वाली गिरिराज शिला; 4 परिक्रमा से गोवर्धन परिक्रमा का फल।
वृंदावन मंडल · श्री राधा गोपीनाथ
मधु पंडित गोस्वामी द्वारा स्थापित अति-प्राचीन मंदिर — सप्त देवालयों में सप्तम।
वृंदावन मंडल · भगवान रंगनाथ
दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली (गोपुरम) में बना उत्तर भारत का सबसे बड़ा मंदिर — गरुड़ स्तंभ व स्वर्ण ध्वज स्तंभ।
वृंदावन मंडल · रासलीला स्थल
श्री बांके बिहारी का प्राकट्य स्थल — मान्यता है कि यहाँ आज भी नित्य रासलीला होती है; संध्या आरती के बाद प्रवेश वर्जित।
वृंदावन मंडल · श्री राधा-कृष्ण
मार्बल टेम्पल — स्वयंभू ट्विस्टेड पिलर्स (टेढ़े खंभे) के लिए विश्व प्रसिद्ध।
वृंदावन मंडल · माँ कात्यायनी
भारत के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक — ब्रज गोपियों ने यहाँ कृष्ण को पति रूप में पाने हेतु तप किया था।
गोवर्धन व राधाकुंड · श्री गिरिराज दानघाटी
जहाँ बाल कृष्ण ने गोपियों से दान (माखन-दही का कर) लिया था — गोवर्धन परिक्रमा का प्रमुख स्थल।
गोवर्धन व राधाकुंड · श्रीनाथजी मुखारविंद
महाप्रभु वल्लभाचार्य की बैठक व श्रीनाथजी का मूल प्राकट्य स्थल।
गोवर्धन व राधाकुंड · राधाकुंड / श्यामकुंड
अरिष्टासुर वध के पश्चात श्री राधा-कृष्ण द्वारा अपने कंकणों से निर्मित कुंड — कार्तिक बहुलाष्टमी स्नान का विशेष महत्व।
गोवर्धन व राधाकुंड · कुसुम सरोवर
राजा सूरजमल (भरतपुर) द्वारा निर्मित भव्य मराठा-राजपूत स्थापत्य की छतरियां।
गोवर्धन व राधाकुंड · श्री हरदेव जी
गोवर्धन का अति-प्राचीन मंदिर — स्वामी हरिदास जी के पूर्वजों की आराधना स्थली।
गोवर्धन व राधाकुंड · श्री गिरिराज
गोवर्धन परिक्रमा की दक्षिणी सीमा — कृष्ण के परम मित्र लोटा बाबा का निवास स्थान।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · श्री लाडली जी (राधा रानी)
भानुगढ़ पहाड़ी पर स्थित — राजा वृषभानु द्वारा स्थापित; जयपुर-राजस्थानी वास्तुकला।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · मान गढ़
जहाँ श्री राधा रानी मान (रूठना) करती थीं — रमेश बाबा जी द्वारा संचालित संरक्षण केंद्र।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · मोर कुटी कुंज
जहाँ राधा जी को प्रसन्न करने हेतु श्री कृष्ण ने मयूर नृत्य किया था।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · नंद-यशोदा-कृष्ण
नंद बाबा और यशोदा मइया का निज निवास — नंदीश्वर पहाड़ी पर स्थित।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · पावन सरोवर
जहाँ नंद बाबा और श्री कृष्ण नित्य स्नान करते थे।
बरसाना, नंदगांव व संकेत धाम · संकेत द्वार
बरसाना और नंदगांव के मध्य — राधा-कृष्ण का प्रथम गुप्त मिलन संकेत स्थल।
गोकुल, महावन, रावल व ब्रह्मांड घाट · श्री राधा-माधव
श्री राधा रानी का वास्तविक जन्म स्थान — प्राचीन राधा-माधव विग्रह।
गोकुल, महावन, रावल व ब्रह्मांड घाट · बाल-कृष्ण
विश्वकर्मा द्वारा निर्मित 84 नक्काशीदार पत्थर स्तंभों पर टिका बाल-कृष्ण का निवास स्थान।
गोकुल, महावन, रावल व ब्रह्मांड घाट · बाल लीला स्थल
जहाँ बाल कृष्ण और बलराम मिट्टी में लोट-पोट होकर बाल-क्रीड़ा करते थे।
गोकुल, महावन, रावल व ब्रह्मांड घाट · ब्रह्मांड दर्शन स्थल
जहाँ बाल कृष्ण ने माखन खाने के बहाने माता यशोदा को सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन करवाए।
गोकुल, महावन, रावल व ब्रह्मांड घाट · चिंताहरण महादेव
यमुना तट का शिव मंदिर — यहाँ माता यशोदा ने बाल कृष्ण की चिंता निवारण हेतु शिव पूजन किया।
भांडीरवन, बेलवन व मानसरोवर · श्री राधा-कृष्ण विवाह स्थल
ब्रह्मा जी की उपस्थिति में श्री राधा-कृष्ण का दिव्य विवाह स्थल।
भांडीरवन, बेलवन व मानसरोवर · महालक्ष्मी
लक्ष्मी जी द्वारा कृष्ण रासलीला देखने हेतु किया गया घोर तप स्थान।
भांडीरवन, बेलवन व मानसरोवर · राधा रानी
रासलीला के समय मान करके आई राधा रानी का अश्रु-पूरित सरोवर।
कामवन, कोकिलावन व सीमावर्ती क्षेत्र · कामेश्वर महादेव
कामवन के रक्षक शिव मंदिर — 84 कोश परिक्रमा का राजस्थान क्षेत्र।
कामवन, कोकिलावन व सीमावर्ती क्षेत्र · चौरासी खंभा
पाण्डवों के अज्ञातवास कालीन अवशेष — 84 स्तंभों वाला प्राचीन मंदिर।
कामवन, कोकिलावन व सीमावर्ती क्षेत्र · कृष्ण लीला स्थल
जहाँ कृष्ण अपने सखाओं के साथ बैठकर भोजन करते और पहाड़ियों से फिसलते थे।
कामवन, कोकिलावन व सीमावर्ती क्षेत्र · वृंदा देवी
तुलसी महारानी (वृंदा देवी) का सिद्ध विग्रह।
कामवन, कोकिलावन व सीमावर्ती क्षेत्र · शनिदेव
जहाँ कृष्ण ने शनिदेव को कोयल (कोकिल) रूप में दर्शन दिए — प्रसिद्ध प्राचीन शनि मंदिर।