श्री बांके बिहारी मंदिर
श्री बांके बिहारी (त्रिभंगी)
स्वामी हरिदास जी की निधि; संवत् 1921 (1864 ई.) में निर्मित। पर्दे के माध्यम से झांकी दर्शन; घंटी-घड़ियाल नहीं बजता।
॥ रास व भक्ति पीठ — सप्त देवालय ॥
स्वामी हरिदास से षड् गोस्वामी तक — वृंदावन के सप्त देवालय, निधिवन, शाहजी मंदिर व कात्यायनी पीठ की नित्य लीला भूमि।
11 विरासत स्थल
श्री बांके बिहारी (त्रिभंगी)
स्वामी हरिदास जी की निधि; संवत् 1921 (1864 ई.) में निर्मित। पर्दे के माध्यम से झांकी दर्शन; घंटी-घड़ियाल नहीं बजता।
श्री राधा रमण
संवत् 1599 में गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा शालिग्राम शिला से प्रकटित विग्रह — 500 वर्षों से अनवरत अग्नि पर प्रसाद।
श्री गोविंद देव जी
राजा मानसिंह द्वारा 1590 ई. में लाल बलुआ पत्थर से निर्मित 7-मंजिला भव्य मंदिर — मध्यकालीन स्थापत्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण।
श्री मदन मोहन
वृंदावन का सबसे पुराना स्थापित मंदिर (सनातन गोस्वामी) — द्वादशादित्य टीले पर 50+ फीट ऊंचा शिखर।
श्री राधा वल्लभ
हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित — राधा-कृष्ण के अभिन्न स्वरूप की पूजा; राधा जी का विग्रह नहीं, केवल गद्दी व मुकुट।
श्री राधा दामोदर
जीव गोस्वामी द्वारा स्थापित — श्री कृष्ण के चरण-चिह्न वाली गिरिराज शिला; 4 परिक्रमा से गोवर्धन परिक्रमा का फल।
श्री राधा गोपीनाथ
मधु पंडित गोस्वामी द्वारा स्थापित अति-प्राचीन मंदिर — सप्त देवालयों में सप्तम।
भगवान रंगनाथ
दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली (गोपुरम) में बना उत्तर भारत का सबसे बड़ा मंदिर — गरुड़ स्तंभ व स्वर्ण ध्वज स्तंभ।
रासलीला स्थल
श्री बांके बिहारी का प्राकट्य स्थल — मान्यता है कि यहाँ आज भी नित्य रासलीला होती है; संध्या आरती के बाद प्रवेश वर्जित।
श्री राधा-कृष्ण
मार्बल टेम्पल — स्वयंभू ट्विस्टेड पिलर्स (टेढ़े खंभे) के लिए विश्व प्रसिद्ध।
माँ कात्यायनी
भारत के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक — ब्रज गोपियों ने यहाँ कृष्ण को पति रूप में पाने हेतु तप किया था।